» वजन घटाने के लिए टॉप 5 योग आसन
आज के समय में सभी अपने सौंदर्य, रहन-सहन और फिटनेस को लेकर जागरूक हैं। जिसका प्रमाण जिम व पार्लर में युवाओं की बढ़ती संख्या से मिलता है। साथ ही बाज़ार में महिलाओं और पुरुषों दोनों के लिए प्रोडक्ट्स मिल रहे हैं, हालाँकि इनमें से कुछ तो विश्वसनीय होते हैं लेकिन अधिकतर अपनी कसौटियों पर खरे नहीं उतर पाते। ऐसे में जरूरत होती हैं उन तरीकों या विधियों की जिनपर आँख मूँद कर भरोसा किया जा सके, इन्हीं पद्धतियों में शामिल है योग।
योग एक ऐसा माध्यम है जिसका नियमित अभ्यास आपको किसी भी दवा से बेहतर व संतोषजनक परिणाम दे सकता है। ऋषि- मुनियों के समय से प्रचलित यह विद्या आज पूरे विश्व द्वारा अपनाई जा रही है। इससे न केवल आप एक अद्भुत शांति का अनुभव करते हैं बल्कि शारीरिक स्फूर्ति के लिए भी योग सबसे आसान व उपयुक्त है। योग में शामिल कुछ विशेष आसनों से आप शरीर की अतिरिक्त चर्बी से छुटकारा पाकर चुस्त-दुरुस्त काया पा सकते हैं वो भी बिना किसी दुष्प्रभाव के:
नोट- कोई भी आसन करते समय विशेष सावधानी बरतें। यदि आप योग सीख रहें हैं तो किसी जानकार की सलाह अवश्य लें। दर्द या न कर पाने की स्थिति में किसी तरह का जोर न डालें। ध्यान रहे कि निरंतर अभ्यास से ही आप सफल हो पाएंगें।
* चक्रासन (Chakrasana)
इस आसन में पहले पीठ के सहारे लेट जाएं, फिर घुटनों को मोड़ें और दोनों पैरों के बीच कुछ दूरी बनाकर रखें। दोनों हाथ शरीर के बराबर में और हथेलियों को ज़मीन पर टिकाये रखें। धीरे-धीरे अपने शरीर का भार कंधों और पैरों पर डालते हुए कमर और पृष्ट भाग को ऊपर उठाएं। 30 सेकेंड से लेकर 01 मिनट तक इस अवस्था में रहें। फिर शरीर को धीरे-धीरे सतह पर ले आएं। इस अभ्यास को पांच बार दोहराएं।
* धनुरासन (Dhanurasana)
इस आसन की आकृति एक धनुष के समान होती है इसलिए इसे धनुरासन कहा जाता है। सबसे पहले पेट के बल लेट जाएँ और श्वास को सामान्य होने दें। अब दोनों पैरों को ऊपर की ओर लायें और हाथों से पकड़ लें। धीरे-धीरे सिर और पैरों को एक दूसरे के नज़दीक लायें, श्वास के सामान्य होने तक इसी अवस्था में थोड़ी देर के लिए रहें। सांस को छोड़ते हुए पुनः सामान्य अवस्था में आ जाएँ और शरीर को ढीला छोड़ दें।
* पश्चिमोत्तनासन (Paschimottanasana)
इस आसन के अभ्यास से मोटापा दूर तथा मधुमेह का रोग ठीक होता है। अपने पैरों को सामने की ओर करके सीधे बैठ जाएँ, ध्यान रहें आपके दोनों पैर आपस में जुड़े हुए व कमर बिल्कुल सीधी हो। पीठ को सीधा रखते हुए सामने की ओर झुकें और अपने हाथों से दोनों पैरों के अंगूठे को छुएं। इस अवस्था में आपके घुटने मुड़े नहीं होने चाहियें तथा माथे को घुटने से छूने की कोशिश करें। 5 सेकेंड तक इस अवस्था में रहें और धीरे-धीरे वापस उठ जाएँ। शुरुआत में जितना झुक सकते हैं उतना ही झुकें, शरीर को किसी तरह का कष्ट न दें।
* भुजंगासन (Bhujangansana)
मैट पर अपने पेट के बल लेट जाएँ। दोनों हाथों की हथेलियों को सीने के पास जमीन पर टिका कर रखें। ध्यान रहे आपके पैर आपस में जुड़ें हों और दोनों के बीच कोई गैप न हों। अब धीरे-धीरे सांस लेते हुए, कमर तक के हिस्से को ऊपर उठाएं और शरीर का सारा भार अपने हाथों, पैरों व जांघों पर डालें। करीब 30 सेकंड बाद सांस छोड़ते हुए पहले अपनी कमर फिर छाती और अंत में अपना सिर नीचे लायें और विश्राम अवस्था में लेट जाएँ।
* उत्तान पादासन (Uttanpadasana)
ज़मीन पर पीठ के बल लेट जाएँ और अपने हाथों को शरीर के पास सीधा रखें। धीरे-धीरे पैरों को ऊपर उठाएं और हाथों को अपने पृष्ट भाग के नीचे ले जाएँ। अब पैरों को पहले 30 डिग्री के कोण तक उठाएं और थोड़ी देर ऐसे ही रहें फिर 60 डिग्री के कोण की स्थिति तक आयें और थोड़ी देर रुकें, अंत में पैरों को 90 डिग्री का कोण बनाने तक की सीध पर उठा लें। यह आसन आपके वजन कम करने के प्रयास में पूर्ण रूप से योग्य साबित होगा।
» आयुर्वेद से घटाएं वजन
आयुर्वेदिक तरीके से वजन घटाना सबसे सुरक्षित माना जाता है। जिसका सबसे बड़ा फायदा है इसका कोई भी दुष्प्रभाव न होना। भागदौड़ भरी ज़िन्दगी में न तो किसी के पास व्यायाम करने का वक़्त है और न ही अपने ऊपर समय देने का, इसीलिए वे जल्दी और कम मेहनत के तरीकों की तरफ आकर्षित होते हैं। आयुर्वेद उन तरीकों में शामिल है जो आपको एक हेल्थी लाइफ देता है और इसके प्रभाव लम्बे समय तक आपके साथ रहते हैं। तो जानिए आयुर्वेद के कुछ आसान और कारगार उपाय वजन घटाने (Ayurvedic Weight Loss Tips in Hindi) के:
* बढ़ाएं पाचन शक्ति (Increase digestion)
आयुर्वेद के अनुसार, वात, पित्त और कफ दोषों के असंतुलन से कम और अधिक वजन की समस्या उत्पन्न होती है। अपने खाने में उन पदार्थों को शामिल करें जिनसे पाचन शक्ति में वृद्धि होती है जैसे अदरक, पपीता, आम, अनानास, और कड़वे तरबूज।
* आहार करें नियमित (Control Diet)
नियमित आहार और संतुलित जीवन शैली को अपनाएँ। पाचन में सुधार करने के लिए पूरे दिन गर्म पियें, प्रतिदिन 2-3 बार अदरक की चाय और सप्ताह में एक दिन उपवास रखें।
* काम के हैं ये मसाले (Useful Spices)
जड़ीबूटियों और मसालों का उपयोग जैसे जीरा, सरसों के बीज, लाल मिर्च और कालीमिर्च को अपने आहार में शामिल करें। नियमित रूप से व्यायाम, योग, ध्यान, और प्राणायाम अथवा श्वासव्यायाम जरूर करें।
* करें आयुर्वेदिक जड़ीबूटियों का इस्तेमाल (Use Ayurvedic Herbs)
पाउडर या कैप्सूल के रूप में, गोटु कोला, आंवला और शिलाजीत जैसी जड़ीबूटी लें। दिन में दो से तीन बार, अदरक और शहद के साथ एक चम्मच गुग्गल लें। बराबर भागों में चित्रक, कुटकी और त्रिकटु मिक्स करें, रोजाना गर्म पानी के साथ आधा चम्मच लें।
* घरेलू आयुर्वेदिक काढ़ा (Homemade Ayurvedic Kadha)
सामग्री-
शुद्ध शिलाजीत, सूखी मेथी, दारुहल्दी, करंजी, आंवला, गिलोय, कुटकी, बहेड़ा, हल्दी, बबूल, कालीजीरी, मंजीठ, चिरायता, द्रोणपुष्पी, पंवार, भूमि आंवला, हरड़, गुग्गल, बबूल गोंद, बाकुची
* कैसे बनाये-
2 महीने का काढ़ा बनाने के लिए इन सभी सामग्री को 60-60 ग्राम मिला लें और आधा चम्मच 2 गिलास पानी में तब तक उबालें जब तक एक गिलास न रह जाये। रोज सुबह-शाम खाली पेट ठंडा करके छानकर पियें।
नोट- किसी भी उपाय को करने से पहले एक पेशेवर आयुर्वेदिक चिकित्सक की सलाह अवश्य लें।
आज के समय में सभी अपने सौंदर्य, रहन-सहन और फिटनेस को लेकर जागरूक हैं। जिसका प्रमाण जिम व पार्लर में युवाओं की बढ़ती संख्या से मिलता है। साथ ही बाज़ार में महिलाओं और पुरुषों दोनों के लिए प्रोडक्ट्स मिल रहे हैं, हालाँकि इनमें से कुछ तो विश्वसनीय होते हैं लेकिन अधिकतर अपनी कसौटियों पर खरे नहीं उतर पाते। ऐसे में जरूरत होती हैं उन तरीकों या विधियों की जिनपर आँख मूँद कर भरोसा किया जा सके, इन्हीं पद्धतियों में शामिल है योग।
योग एक ऐसा माध्यम है जिसका नियमित अभ्यास आपको किसी भी दवा से बेहतर व संतोषजनक परिणाम दे सकता है। ऋषि- मुनियों के समय से प्रचलित यह विद्या आज पूरे विश्व द्वारा अपनाई जा रही है। इससे न केवल आप एक अद्भुत शांति का अनुभव करते हैं बल्कि शारीरिक स्फूर्ति के लिए भी योग सबसे आसान व उपयुक्त है। योग में शामिल कुछ विशेष आसनों से आप शरीर की अतिरिक्त चर्बी से छुटकारा पाकर चुस्त-दुरुस्त काया पा सकते हैं वो भी बिना किसी दुष्प्रभाव के:
नोट- कोई भी आसन करते समय विशेष सावधानी बरतें। यदि आप योग सीख रहें हैं तो किसी जानकार की सलाह अवश्य लें। दर्द या न कर पाने की स्थिति में किसी तरह का जोर न डालें। ध्यान रहे कि निरंतर अभ्यास से ही आप सफल हो पाएंगें।
* चक्रासन (Chakrasana)
इस आसन में पहले पीठ के सहारे लेट जाएं, फिर घुटनों को मोड़ें और दोनों पैरों के बीच कुछ दूरी बनाकर रखें। दोनों हाथ शरीर के बराबर में और हथेलियों को ज़मीन पर टिकाये रखें। धीरे-धीरे अपने शरीर का भार कंधों और पैरों पर डालते हुए कमर और पृष्ट भाग को ऊपर उठाएं। 30 सेकेंड से लेकर 01 मिनट तक इस अवस्था में रहें। फिर शरीर को धीरे-धीरे सतह पर ले आएं। इस अभ्यास को पांच बार दोहराएं।
* धनुरासन (Dhanurasana)
इस आसन की आकृति एक धनुष के समान होती है इसलिए इसे धनुरासन कहा जाता है। सबसे पहले पेट के बल लेट जाएँ और श्वास को सामान्य होने दें। अब दोनों पैरों को ऊपर की ओर लायें और हाथों से पकड़ लें। धीरे-धीरे सिर और पैरों को एक दूसरे के नज़दीक लायें, श्वास के सामान्य होने तक इसी अवस्था में थोड़ी देर के लिए रहें। सांस को छोड़ते हुए पुनः सामान्य अवस्था में आ जाएँ और शरीर को ढीला छोड़ दें।
* पश्चिमोत्तनासन (Paschimottanasana)
इस आसन के अभ्यास से मोटापा दूर तथा मधुमेह का रोग ठीक होता है। अपने पैरों को सामने की ओर करके सीधे बैठ जाएँ, ध्यान रहें आपके दोनों पैर आपस में जुड़े हुए व कमर बिल्कुल सीधी हो। पीठ को सीधा रखते हुए सामने की ओर झुकें और अपने हाथों से दोनों पैरों के अंगूठे को छुएं। इस अवस्था में आपके घुटने मुड़े नहीं होने चाहियें तथा माथे को घुटने से छूने की कोशिश करें। 5 सेकेंड तक इस अवस्था में रहें और धीरे-धीरे वापस उठ जाएँ। शुरुआत में जितना झुक सकते हैं उतना ही झुकें, शरीर को किसी तरह का कष्ट न दें।
* भुजंगासन (Bhujangansana)
मैट पर अपने पेट के बल लेट जाएँ। दोनों हाथों की हथेलियों को सीने के पास जमीन पर टिका कर रखें। ध्यान रहे आपके पैर आपस में जुड़ें हों और दोनों के बीच कोई गैप न हों। अब धीरे-धीरे सांस लेते हुए, कमर तक के हिस्से को ऊपर उठाएं और शरीर का सारा भार अपने हाथों, पैरों व जांघों पर डालें। करीब 30 सेकंड बाद सांस छोड़ते हुए पहले अपनी कमर फिर छाती और अंत में अपना सिर नीचे लायें और विश्राम अवस्था में लेट जाएँ।
* उत्तान पादासन (Uttanpadasana)
ज़मीन पर पीठ के बल लेट जाएँ और अपने हाथों को शरीर के पास सीधा रखें। धीरे-धीरे पैरों को ऊपर उठाएं और हाथों को अपने पृष्ट भाग के नीचे ले जाएँ। अब पैरों को पहले 30 डिग्री के कोण तक उठाएं और थोड़ी देर ऐसे ही रहें फिर 60 डिग्री के कोण की स्थिति तक आयें और थोड़ी देर रुकें, अंत में पैरों को 90 डिग्री का कोण बनाने तक की सीध पर उठा लें। यह आसन आपके वजन कम करने के प्रयास में पूर्ण रूप से योग्य साबित होगा।
» आयुर्वेद से घटाएं वजन
आयुर्वेदिक तरीके से वजन घटाना सबसे सुरक्षित माना जाता है। जिसका सबसे बड़ा फायदा है इसका कोई भी दुष्प्रभाव न होना। भागदौड़ भरी ज़िन्दगी में न तो किसी के पास व्यायाम करने का वक़्त है और न ही अपने ऊपर समय देने का, इसीलिए वे जल्दी और कम मेहनत के तरीकों की तरफ आकर्षित होते हैं। आयुर्वेद उन तरीकों में शामिल है जो आपको एक हेल्थी लाइफ देता है और इसके प्रभाव लम्बे समय तक आपके साथ रहते हैं। तो जानिए आयुर्वेद के कुछ आसान और कारगार उपाय वजन घटाने (Ayurvedic Weight Loss Tips in Hindi) के:
* बढ़ाएं पाचन शक्ति (Increase digestion)
आयुर्वेद के अनुसार, वात, पित्त और कफ दोषों के असंतुलन से कम और अधिक वजन की समस्या उत्पन्न होती है। अपने खाने में उन पदार्थों को शामिल करें जिनसे पाचन शक्ति में वृद्धि होती है जैसे अदरक, पपीता, आम, अनानास, और कड़वे तरबूज।
* आहार करें नियमित (Control Diet)
नियमित आहार और संतुलित जीवन शैली को अपनाएँ। पाचन में सुधार करने के लिए पूरे दिन गर्म पियें, प्रतिदिन 2-3 बार अदरक की चाय और सप्ताह में एक दिन उपवास रखें।
* काम के हैं ये मसाले (Useful Spices)
जड़ीबूटियों और मसालों का उपयोग जैसे जीरा, सरसों के बीज, लाल मिर्च और कालीमिर्च को अपने आहार में शामिल करें। नियमित रूप से व्यायाम, योग, ध्यान, और प्राणायाम अथवा श्वासव्यायाम जरूर करें।
* करें आयुर्वेदिक जड़ीबूटियों का इस्तेमाल (Use Ayurvedic Herbs)
पाउडर या कैप्सूल के रूप में, गोटु कोला, आंवला और शिलाजीत जैसी जड़ीबूटी लें। दिन में दो से तीन बार, अदरक और शहद के साथ एक चम्मच गुग्गल लें। बराबर भागों में चित्रक, कुटकी और त्रिकटु मिक्स करें, रोजाना गर्म पानी के साथ आधा चम्मच लें।
* घरेलू आयुर्वेदिक काढ़ा (Homemade Ayurvedic Kadha)
सामग्री-
शुद्ध शिलाजीत, सूखी मेथी, दारुहल्दी, करंजी, आंवला, गिलोय, कुटकी, बहेड़ा, हल्दी, बबूल, कालीजीरी, मंजीठ, चिरायता, द्रोणपुष्पी, पंवार, भूमि आंवला, हरड़, गुग्गल, बबूल गोंद, बाकुची
* कैसे बनाये-
2 महीने का काढ़ा बनाने के लिए इन सभी सामग्री को 60-60 ग्राम मिला लें और आधा चम्मच 2 गिलास पानी में तब तक उबालें जब तक एक गिलास न रह जाये। रोज सुबह-शाम खाली पेट ठंडा करके छानकर पियें।
नोट- किसी भी उपाय को करने से पहले एक पेशेवर आयुर्वेदिक चिकित्सक की सलाह अवश्य लें।
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